Satyamev Jayate
Plant Authority
गृह पृष्ठ सामान्यत: पूछे जाने वाले प्रश्न

सामान्यत: पूछे जाने वाले प्रश्न

Collapse all | Expand all
प्र. 1 पौधा किस्मों की सुरक्षा इतना महत्वपूर्ण मुद्दा क्यों हो गया है?
उ0 प्रजनन संबंधी कार्य और नई किस्मों का उपयोग ग्रामीण आय को सुधारने तथा उनके समग्र आर्थिक विकास के लिए एक निर्णायक घटक है। चूंकि पौधों के प्रजनन की क्रिया लंबी और महंगी है, अतः समाज के लाभ के लिए पौधों की नई किस्मों के विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पौधा किस्मों की सुरक्षा की एक प्रभावी प्रणाली का उपलब्ध होना बहुत महत्वपूर्ण है।
प्र. 2 (a) किस्म क्या है ?
उ0 किस्म का अर्थ किसी एक वानस्पतिक वर्ग की न्यूनतम ज्ञात श्रेणी जिसके अंतर्गत सूक्ष्मजीवों को छोड़कर पौधों का समूहीकरण है जिसे निम्नानुसार किया जा सकता है: -
(i)गुणों की अभिव्यक्ति के रूप में परिभाषित। ये गुण उस समूहीकरण के दिए गए जीनप्ररुप का परिणाम होते हैं.
(ii) कम से कम एक कथित गुण की अभिव्यक्ति द्वारा पौधे के किसी अन्य समूह से भेद करना; और
(iii) प्रवर्धन के लिए उपयुक्तता के मामले में ऐसी इकाई के रूप में मानना जो ऐसे प्रवर्धन के बाद भी अपरिवर्तित रहती है और इसमें ऐसी किस्म, विद्यमान किस्म, पराजीनी किस्म, कृषक किस्म और अनिवार्य रूप से व्युत्पन्न किस्म की रोपण सामग्री शामिल है।.
प्र. 2 (b) अनिवार्य रूप से व्युत्पन्न किस्म (ईडीवी)?
उ0 इसका अर्थ वह किस्म है जो निम्न में से किसी भी विधि द्वारा विद्यमान किस्म से अनिवार्य रूप से व्युत्पन्न की गई है:
(i) आनुवंशिक अभियांत्रिकी
(ii) उत्परिवर्तन
(iii) ऊतक संवर्धन से व्युत्पन्न
(iv) प्रतीप संकर से व्युत्पनन
(v) कोई अन्य (गुणता परिवर्तन) आदि
ईडीवी किसी भी आरंभिक किस्म की तुलना में स्पष्ट रूप से प्रभेदनशील है तथा यह अनिवार्य गुणों की अभिव्यक्ति मे आरंभिक किस्म की इस प्रकार पुष्टि करती है (व्युत्पन्नता के कार्य के परिणामस्वरूप भिन्नताओं के अतिरिक्त) कि यह उस आरंभिक किस्म के जीनप्ररुप या संयोग के समरुप होते हैं।
प्र. 3 पीपीवी और एफआर अधिनियम में कृषक की क्या परिभाषा है?
उ0 कृषक वह व्यक्ति है जो:
(i) अपने खेत में खेती करते हुए फसलें उगाता है;
(ii) किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से भूमि की खेती के प्रत्यक्ष अधीक्षण द्वारा फसलें उगाता है; या
(iii) उपयोगी गुणों के चयन व पहचान के माध्यम से किसी अन्य वन्य प्रजाति अथवा परंपरागत किस्म को स्वयं या मिल-जुलकर अथवा किसी अन्य व्यक्ति के साथ संरक्षित व सुरक्षित करता है।
प्र. 4 (a) कृषक किस्म क्या है?
उ0 वह किस्म जो: (*) किसानों द्वारा उनके खेतों में परंपरागत रूप से उगाई और विकसित जाती है;
(*) ऐसी वन्य संबंधी या भू-प्रजाति है जिसके बारे में किसानों को सामान्य ज्ञान है;
(*) कृषक किस्म को आवेदन/पंजीकरण शुल्क से छूट प्राप्त है तथा ऐसी किस्म के आवेदन के लिए शुल्क या निर्वंशकरण (टर्मिनेटर) प्रौद्योगिकी के लिए हलफ़नामे की जरुरत नहीं है।
प्र. 4 (b)बीज परीक्षण के लिए शुद्धता मानकों व अपेक्षाओं में क्या कोई छूट का प्रावधान है?
उ0 कृषक किस्मों के लिए बेमेल पौधों की संख्या नई किस्म के लिए निर्धारित बेमेल पौधों की संख्या से दुगने का लाभ दिया गया है। नई किस्म के लिए निर्धारित मात्रा की तुलना में कृषक किस्म के परीक्षण हेतु आधे बीज की आवश्यकता होती है।
प्र. 5 कृषक के अधिकार क्या हैं?
Ans. उ0 1. जिस कृषक ने कोई नई किस्म प्रजनित या विकसित की है उसे अपनी किस्म को पीपीवी और एफआर अधिनियम 2001 के अंतर्गत पंजीकरण व अन्य सुरक्षा संबंधी वैसे ही अधिकार होंगे जैसे किसी किस्म के प्रजनक को प्रदान किए जाते हैं।
2. कोई कृषक यदि चयन और परिरक्षण के माध्यम से सुधार करके आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण भू-प्रजातियों व उनके वन्य संबंधियों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में रत है उसे आनुवंशिक विधि से निर्धारित विधि के अनुसार सम्मान और पुरस्कार का अधिकार प्राप्त होगा, बशर्ते कि इस प्रकार से चुनी गई और परिरक्षित सामग्री का उपयोग इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किस्मों में जीनों के दाताओं के रूप में किया गया हो।
3. कोई कृषक इस अधिनियम के अंतर्गत सुरक्षित किस्म के बीज सहित उसी प्रकार से अपनी किस्म के बीज को बचाने, उपयोग करने, बोने, पुनः बोने, विनिमय करने और भागीदारी करने या बेचने का अधिकारी होगा जैसा कि वह इस अधिनियम के लागू होने के पहले था, लेकिन किसान इस अधिनियम के अंतर्गत सुरक्षित किसी किस्म के ब्राण्डयुक्त बीज को बेचने का अधिकारी नहीं होगा।
प्र. 6 पंजीकृत पौधा किस्म की सुरक्षा की अवधि क्या है?
उ0 विभिन्न प्रकार की फसलों की विभिन्न पंजीकृत किस्मों की सुरक्षा की अवधि निम्नानुसार है:
1. वृक्ष और लताएं -                  18 वर्ष
2. अन्य फसलों के लिए -                  15 वर्ष
3. विद्यमान अधिसूचित किस्मों के लिए - बीज अधिनियम, 1966 की धारा 5 के अंतर्गत अधिसूचना की तिथि से 15 वर्ष
प्र. 7 क्या विद्यमान श्रेणी के अन्दर किस्मों के आवेदन करने के लिये कोई समय सीमा हैं?
उ0 जी हां, सामान्यतः समय सीमा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित की जाती हैं। ये पौधा किस्म जरनल में प्रकाषन की तिथि से 6 वर्ष विद्यमान किस्म (कृृषक किस्मों को छोडकर) तथा 10 वर्ष कृृषक किस्मों के पंजीकरण कि लिये निर्धारित की गयी हैं।
प्र. 8 क्या कोई किस्म विद्यमान श्रेणी के अन्दर समय सीमा समाप्ती के बाद भी पंजीकरण के लिये भेजी जा सकती हैं। ?
उ0 नही।
प्र. 9 आवेदक अपनी किस्मों की स्थिति के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
उ0 प्राधिकरण की वेबसाईट पर समय-समय पर स्थिति अपलोड की जाती हैं वहां से आवेदक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्र. 10 क्या प्रकृति में पाए गए और उगने वाले नए विशिष्ट पौधे को सुरक्षित किया जा सकता है?
Ans. उ0 वर्तमान में वन्य अवस्था में उपस्थित किस्मों के पौधों को पीपीवी और एफआर प्राधिकरण के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। तथापि, कोई भी परंपरागत रूप से उगाई गई वह किस्म जिसकी खेती करना/जिसमें सुधार के लिए मानवीय हस्तक्षेप किया गया हो, को पात्र मानदंड पूरा करने पर पंजीकृत और सुरक्षित किया जा सकता है।
प्र. 11 वे गुण कौन-से हैं जिनका उपयोग किसी किस्म को विभेदित करने में किया जा सकता है?
उ0 कोई भी नई किस्म कम से कम एक अनिवार्य गुण में अन्य किस्मों से अलग होनी चाहिए।
प्र. 12 पौधा किस्म के पंजीकरण के लिए आवेदन-पत्र भरने के लिए पहले से क्या-क्या तैयारियां होनी चाहिए?
उ0 पौधा किस्म के पंजीकरण के लिए निम्न पूर्व अपेक्षाओं को पूरा किया जाना चाहिए:
(1) ऐसी किस्म को कोई नाम दिया जाना चाहिए।
(2) आवेदन के साथ ऐसा हलफ़नामा होना चाहिए कि संबंधित किस्म में निर्वंश प्रौद्योगिकी में शामिल कोई जीन या जीन क्रम नहीं है।
(3) भारत में भौगोलिक स्थिति सहित उस किस्म के पूर्वज वंशक्रम के सम्पूर्ण पासपोर्ट आंकड़े जिनसे किस्म उत्पन्न की गई है तथा योगदान से संबंधित सभी सूचना, यदि कोई हो, जैसे कोई किसान/कई किसान, गांव, समुदाय, संस्था या संगठन जो उस किस्म के प्रजनन, उद्भव या विकास में शामिल हो।
(4) नवीनता, विशिष्टता, एकरूपता और स्थायित्व के विवरण के साथ किस्म के गुण।
(5) इस आशय की घोषणा की संबंधित किस्म के प्रजनन के लिए प्रयुक्त आनुवंशिक सामग्री कानूनी रूप से प्राप्त की गई है।
(6) पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाला प्रजनक या कोई अन्य व्यक्ति यह बताएगा कि ऐसी किस्म के सुधार के लिए किसी आदिवासी या ग्रामीण परिवार द्वारा आनुवंशिक सामग्री संरक्षित की जा रही है और इसमें उसका उपयोग हो रहा है।
प्र. 13 पौधा किस्म सुरक्षा आवेदन फार्म में क्या-क्या होता है?
Ans. किसी किस्म के पंजीकरण के लिए आवेदन पीपीवी और एफआर नियमावली 2006 में निर्धारित फार्म में किया जाना चाहिए: (1) फार्म I नई किस्म, विद्यमान किस्म और कृषक किस्म के पंजीकरण के लिए;
(2) फार्म II अनिवार्य रूप से व्युत्पन्न किस्मों (ईडीवी) के लिए
(3) फार्म I/II के साथ संलग्न तकनीकी प्रश्नावली - संबंधित किस्म की विस्तृत सूचना के लिए
इन भरे हुए आवेदन-पत्रों के साथ भारत के राजपत्र दिनांक 15.6.2015 में अधिसूचित शुल्क भी भेजा जाना चाहिए (विवरण वेबसाईट पर उपलब्ध हैं)।
प्र. 14 पौधा किस्म के पंजीकरण के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
उ0 किस्म के पंजीकरण का आवेदन निम्न में से किसी के द्वारा भी दिया जा सकता है: (1) किसी किस्म के प्रजनके होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति;
(2) किस्म के प्रजनक का कुल उराधिकारी;
(3) ऐसे आवेदन के लिए अधिकार के संबंध में किस्म का प्रजनक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति;
(4) कोई भी वह कृषक, कृषक समूह या कृषकों का समुदाय जिसने किस्म के प्रजनक होने का दावा किया हो;
(5) किसानों की ओर से आवेदन करने के लिए प्राधिकृत कोई भी व्यक्ति; और
(6)किस्म के प्रजनक का दावा करने वाला कोई विश्वविद्यालय या सार्वजनिक निधि से चलने वाला कृषि संस्थान।
प्र. 15 पौधा किस्मों के पंजीकरण के लिए आवेदन करने के लिए कौन सा कार्यालय है ?
उ0 पौधा किस्मों के पंजीकरण के लिए आवेदन रजिस्ट्रार, पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली से किया जा सकता है। इस कार्यालय का पता है: रजिस्ट्रार, पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, सोसायटी ब्लाॅक, दूसरा तल, एनएएससी परिसर, डीपीएस मार्ग, टोडापुर के निकट, नई दिल्ली-110012 । सुरक्षा, आवेदन, शुल्क आदि से संबंधित कोई भी सूचना इस कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। वांछित शुल्क/प्रभारों सहित पूरी तरह भरे गए आवेदन-पत्र की तीन प्रतियां सभी संलग्नों सहित रजिस्ट्रार को प्रस्तुत की जानी चाहिए। इसके साथ तकनीकी प्रश्नावली, नई दिल्ली कार्यालय में हलफ़नामे के साथ पंजीकृत डाक द्वारा या स्वयं प्रस्तुत किए जा सकते हैं। आवेदकों को सुविधा प्रदान करने के लिए गुवहाटी (असम) और रांची (झारखंड) में दो शाखा कार्यालय भी खोले गए हैं।
प्र. 16 पौधा किस्मों के पंजीकरण के लिए क्या एजेंट के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है ?
उ0 जी हां, कोई प्रजनक या कृषक व्यक्तिगत तौर पर या अपने एजेंट के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है।
प्र. 17 पंजीकरण के पूर्व क्या बीज/प्रवर्धन सामग्री का प्रस्तुत किया जाना जरूरी है ?
जी हां, प्राधिकरण में किस्म को पंजीकृत कराने के लिए उस बीज के पूर्वज वंशक्रम बीजों सहित बीज/प्रवर्धन सामग्री को जमा कराने की आवश्यकता होती है। आवेदक को निर्धारित अंकुरण प्रतिशत, भौतिक शुद्धता और पादप-स्वच्छता मानकों सहित बीज नमूने (प्रजनक बीज) की निर्धारित मात्रा प्रस्तुत करनी होती है। आवेदक को बीज/रोपण या प्रवर्धन सामग्री के साथ बीज गुणवŸाा संबंधी परीक्षण रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होती है।
प्र. 18 प्राधिकरण को प्राप्त होने वाले बीजों के साथ क्या किया जाता है ?
उ0 प्राधिकरण द्वारा प्राप्त बीज नमूनों को उनकी शुद्धता तथा अंकुरण के लिए उचित प्रकार से परीक्षित किया जाता है। बीज का एक भाग डीयूएस परीक्षणों के लिए परीक्षण केन्द्र भेजा जाता है और दूसरा भाग सुरक्षा की सम्पूर्ण अवधि तक पंजीकृत किस्मों के बीज नमूनों को रखने के लिए प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय जीन बैंक में रखा जाता है।
प्र. 19 क्या कोई व्यक्ति बाजार में पहले से उपलब्ध किस्म के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है?
उ0 किसी भी उस नई किस्म के पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है जो बाजार में मौजूद हो, लेकिन बाजार में उसे आए एक वर्ष से अधिक का समय न हुआ हो। अन्य किसी पुरानी किस्म के पंजीकरण के लिए उसे विद्यमान किस्म के रूप में पंजीकृत करने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
प्र. 20 किसी पौधा किस्म के पंजीकरण की क्या लागत है?
उ0 पीपीवी और एफआर प्राधिकरण द्वारा निम्नलिखित शुल्क निर्धारित किया गया है:
क. फार्म की कीमत
1. आवेदन फार्म निपटान प्रभार:- 200/-

ख. पंजीकरण प्रभार:-
पंजीकरण के लिए शुल्क
किस्म का प्रकार पंजीकरण शुल्क
अनिवार्य रूप से व्युत्पन्न/नई किस्में/ विद्यमान किस्म जिसके बारे में सामान्य ज्ञान है व्यक्तिगत     7000/-
शैक्षणिक      10000/-
वाणिज्यिक    50000/-
बीज अधिनियम, 1966 की धारा 5 के अंतर्गत अधिसूचित विद्यमान किस्म 2000/-
कृषक किस्मकोई शुल्क नहीं

ग. प्राधिकरण की वेबसाईट पर डीयूएस परिक्षण शुल्क की सूची उपलब्ध हैं।

घ. वार्षिक शुल्क
किस्म का प्रकारवार्षिक शुल्क
नई किस्म 2000/- + पिछले वर्ष के दौरान पंजीकृत किस्म के बीजों के बिक्री मूल्य का 0.2 प्रतिशत + पिछले वर्ष के दौरान पंजीकृत किस्म के बीजों की बिक्री से प्राप्त रायल्टी, यदि कोई हो, तो उसका 1 प्रतिशत
बीज अधिनियम 1966 (1966 का 54) की धारा 5 के अंतर्गत अधिसूचित विद्यमान किस्म 2000/-
विशिष्टीकृत श्रेणी के अतिरिक्त कोई अन्य विद्यमान किस्म 2000/- + पिछले वर्ष के दौरान पंजीकृत किस्म के बीजों के बिक्री मूल्य का 0.1 प्रतिशत + पिछले वर्ष के दौरान पंजीकृत किस्म के बीजों की बिक्री से प्राप्त रायल्टी, यदि कोई हो, तो उसका 0.5 प्रतिशत
वार्षिक शुल्क का निर्धारण अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किस्म की पिछले वर्ष हुई बिक्री मूल्य के संबंध में पंजीकृत प्रजनक या एजेंट या लाइसेंसी द्वारा की गई घोषणा के अनुसार किया जाएगा और इसमें पंजीकृत किस्म के बीजों की बिक्री से पिछले वर्ष प्राप्त होने वाली रायल्टी, यदि कोई हो, को भी शामिल किया जाएगा तथा इसका सत्यापन प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। स्थिति जानने के लिए प्राधिकरण की वेबसाईट को देखें।
English Hindi